पारंपरिक एवं सामाजिक सेवा:
- गौ सेवा (सर्वोच्च प्राथमिकता): देसी गायों का संरक्षण, गौशाला संचालन, पंचगव्य उत्पादन, जैविक खाद/वर्मीकम्पोस्ट निर्माण, गोमूत्र से औषधि, बूढ़ी/बीमार गायों की सेवा, बछड़ा-बछिया पालन, कृषि बैल संरक्षण और गो-दान समारोह।
- पशु कल्याण: 24×7 पशु चिकित्सालय, निःशुल्क उपचार व टीकाकरण, आवारा कुत्तों/बिल्लियों/पक्षियों के लिए आश्रय (Shelter)।
- अन्नदान/जल सेवा: दैनिक भोजन, भंडारे, साधु-संत भोजन, प्याऊ और पक्षियों के लिए जल पात्र।
- शिक्षा/संस्कृति: संस्कृत पाठशाला (वेद-शास्त्र), योग व ध्यान शिविर, आधुनिक विद्यालय और छात्रवृत्ति।
- स्वास्थ्य: आयुर्वेद चिकित्सालय, आधुनिक अस्पताल (रियायती इलाज), एम्बुलेंस और रक्तदान/नेत्रदान।
- सामाजिक सहायता: गरीब कन्या विवाह (कन्यादान), विधवा सशक्तिकरण, अनाथालय, ब्लाइंड स्कूल (Blind School), विकलांग सहायता और वृद्धाश्रम।
- धार्मिक: मंदिर निर्माण/जीर्णोद्धार, सत्संग, भजन-कीर्तन, तीर्थ यात्रा सहायता और दाह संस्कार।
- पर्यावरण: वृक्षारोपण, जल संरक्षण और स्वच्छता अभियान।
- महिला-बाल कल्याण: स्किल ट्रेनिंग, मातृत्व देखभाल और टीकाकरण।
- आपातकालीन: आपदा राहत और आपातकालीन दवा/सेवा
आधुनिक भारत एवं तकनीकी (AI) उद्देश्य:
- डिजिटल शिक्षा: डिजिटल साक्षरता (Banking/UPI), कोडिंग, AI/ML प्रशिक्षण।
- साइबर सुरक्षा: साइबर फ्रॉड जागरूकता और फेक न्यूज़ रोकथाम।
- मानसिक स्वास्थ्य: काउंसलिंग, आत्महत्या रोकथाम, तनाव प्रबंधन और नशामुक्ति।
- रोजगार: स्टार्टअप इनक्यूबेशन, जॉब प्लेसमेंट और किसान सहायता।
- गंभीर रोग: कैंसर/गंभीर रोग आर्थिक सहायता और बाल रोग उपचार।
- आधुनिक मुद्दे: वरिष्ठ नागरिक सुरक्षा, सड़क सुरक्षा (Golden Hour)।
- आवास/कानूनी: किफायती आवास, महिला छात्रावास और कानूनी सलाह।
- AI सेवाएं: समाज सेवा हेतु AI टूल्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म।
- सहयोग एवं गठबंधन (Collaboration): “ट्रस्ट के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए, समान उद्देश्यों वाले किसी अन्य पंजीकृत ट्रस्ट, सोसायटी या एनजीओ के साथ सहयोग, गठबंधन (Tie-up) या साझेदारी करना।
न्यासी बोर्ड की संरचना
- आजीवन न्यासी: श्री बृजेश गोयल, श्री हितेश गोयल और श्रीमती मीनाक्षी गोयल।यह पद वंशानुगत (Hereditary) होगा। यदि किसी आजीवन न्यासी का निधन होता है या वह त्यागपत्र देता है, तो उसका कानूनी वारिस (Nominee/Heir) स्वतः ही उसकी जगह “आजीवन न्यासी” बन जाएगा और उसे वही वीटो शक्तियां प्राप्त होंगी।
- विस्तार: वर्तमान में केवल 3 आजीवन न्यासी हस्ताक्षर कर रहे हैं। पंजीकरण के बाद, न्यासी बोर्ड बैठक में प्रस्ताव पारित करके अन्य सदस्यों को शामिल कर सकते हैं व जरूरत महसूस होने पर चुनाव द्वारा वार्षिक कार्यों हेतु अध्यक्ष व अन्य कार्यकारिणी निर्वाचित करवा सकते हैं।
- बोर्ड की कुल सदस्य संख्या: ट्रस्ट की कार्य-आवश्यकताओं के अनुसार बोर्ड की कुल सदस्य संख्या आजीवन सदस्य समय-समय पर निर्धारित करेंगे।
- उप-समितियां (Project Committees): विशिष्ट परियोजनाओं (जैसे गौशाला, विद्यालय आदि) के संचालन हेतु ट्रस्ट अलग ‘प्रबंधन समितियां’ गठित कर सकता है। यह मुख्य ट्रस्ट उन समितियों का ‘मूल संरक्षक’ (Parent Body) होगा और संस्थापक/आजीवन न्यासियों को उन समितियों में भी वही ‘वीटो शक्ति’ (Veto Power) और नियंत्रण प्राप्त होगा जो उन्हें इस मुख्य ट्रस्ट में प्राप्त है।
- नियंत्रण: किसी भी विवाद की स्थिति में आजीवन न्यासियों का निर्णय ही अंतिम माना जायेगा और आजीवन न्यासी, बिना किसी कारण बताये भी, किसी भी निर्वाचित कार्यकारिणी या किसी सदस्य को हटाने/भंग करने का अधिकार रखते हैं।
संस्थापकों की वीटो शक्ति
चूंकि यह ट्रस्ट संस्थापकों द्वारा स्थापित किया गया है, अतः ट्रस्ट के नियंत्रण और मूल उद्देश्यों की सुरक्षा के लिए आजीवन न्यासियों (संस्थापकों) के पास निम्नलिखित सर्वोच्च और असीमित अधिकार होंगे:
- अंतिम निर्णय (Overriding Veto): यदि बोर्ड, कार्यकारिणी या साधारण सभा के किसी निर्णय (चाहे वह बहुमत से पास हो) पर आजीवन न्यासियों की सहमति नहीं है, तो आजीवन न्यासियों का निर्णय ही अंतिम और मान्य होगा।
- कोरम: किसी भी बैठक को वैध मानने के लिए कम से कम 2 आजीवन न्यासियों की उपस्थिति अनिवार्य होगी।
- नियुक्ति: आजीवन न्यासियों को किसी भी बाहरी न्यासी को नियुक्त करने या हटाने का पूर्ण अधिकार होगा।
- वित्तीय: ₹10,000/- (दस हजार रुपये) से अधिक के किसी भी खर्च या संपत्ति के लेन-देन के लिए आजीवन न्यासियों की लिखित अनुमति अनिवार्य होगी।
- अविश्वास प्रस्ताव से सुरक्षा (Immunity): आजीवन न्यासियों के विरुद्ध कोई भी अविश्वास प्रस्ताव (No Confidence Motion) या निष्कासन प्रस्ताव नहीं लाया जा सकता। आजीवन न्यासी अपने पद पर जीवनपर्यंत बने रहेंगे।
- संपत्ति पर नियंत्रण: ट्रस्ट की किसी भी अचल संपत्ति (जमीन/भवन) को बेचने, गिरवी रखने या हस्तांतरित करने का अधिकार केवल और केवल आजीवन न्यासियों की सर्वसम्मति से होगा। अन्य सदस्य इसमें वोट नहीं कर सकते।
- व्याख्या का अधिकार (Interpretation): यदि ट्रस्ट डीड के किसी नियम को लेकर विवाद होता है, तो आजीवन न्यासियों द्वारा की गई व्याख्या (Interpretation) ही अंतिम और बाध्यकारी होगी।
- उत्तराधिकार (Succession): यह वीटो शक्ति केवल वर्तमान संस्थापकों तक सीमित नहीं है। किसी आजीवन न्यासी के निधन या इस्तीफे की स्थिति में, उनके द्वारा नामित उत्तराधिकारी या उनका कानूनी वारिस (Legal Heir) स्वतः ही “आजीवन न्यासी” बन जाएगा और उसे वही “वीटो शक्ति” प्राप्त होगी।
बैंक खाता संचालन
ट्रस्ट के बैंक खाते किसी भी बैंक में खोले जाएंगे। खातों का संचालन निम्न प्रकार होगा:
- “किन्हीं दो आजीवन न्यासियों के संयुक्त हस्ताक्षर से” अथवा
- “एक आजीवन न्यासी और कार्यकारिणी द्वारा अधिकृत किसी एक अन्य न्यासी के संयुक्त हस्ताक्षर से।”
वैधानिक खंड
- निवेश:ट्रस्ट की निधियों का निवेश आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 11(5) के प्रावधानों के अनुसार किया जाएगा।
- अपरिवर्तनीयता: यह ट्रस्ट पूरी तरह से अपरिवर्तनीय (Irrevocable) है।
- विघटन: यदि भविष्य में ट्रस्ट का विघटन करना पड़े, तो इसकी संपत्ति को संस्थापकों या सदस्यों में नहीं बांटा जाएगा, बल्कि समान उद्देश्यों वाले किसी अन्य पंजीकृत ट्रस्ट को हस्तांतरित किया जाएगा।
- संशोधन: ट्रस्ट डीड में संशोधन किया जा सकता है, परंतु ट्रस्ट का नाम और आजीवन न्यासियों की वीटो शक्ति को नहीं बदला जा सकता।
साक्षी के रूप में, हम न्यासकर्ताओं ने अपनी स्वेच्छा से निम्नलिखित गवाहों की उपस्थिति में इस विलेख पर हस्ताक्षर किए हैं।
